रामदास :चौडी़ सड़क गली पतली थी !!!

रामदास
 
चौडी़ सड़क गली पतली थी
दिन का समय घनी बदली थी
रामदास उस दिन उदास था ।
अंत समय आ गया पास था
उसे बता यह दिया गया था उसकी हत्या होगी।
धीरे-धीरे चला अकेले
सोचा साथ किसी को ले ले
फिर रह गया, सड़क पर सब थे
सभी मौन थे सभी निहत्थे
सभी जानते थे यह उस दिन उसकी हत्या होगी।
खड़ा हुआ वह बीच सड़क पर
दोनों हाथ पेट पर रखकर
सधे कदम रख करके आये
लोग सिमट कर आँख गड़ाये
लगे देखने उसको जिसकी तय था हत्या होगी।
निकल गली से तब हत्यारा
आया उसने नाम पुकारा
हाथ तौलकर चाक़ू मारा
कहा नहीं था उसने आख़िर उसकी हत्या होगी।
भीड़ ठेलकर लौट गया वह
मरा पड़ा है रामदास यह
देखो देखो बार-बार कह
लोग निडर उस जगह खड़े रह
लगे बुलाने उन्हें जिन्हें संशय था हत्या होगी।
रधुवीर सहाय हिंदी जगत में एक कवि के रूप में अधिक जाने जाते हैं। ये साहित्य-जगत में उस पीढी़ के सदस्य थे, जो स्वाधीनता आंदोलन की समाप्ति पर रचनाशील हुई थी। नयी कविता के अन्य कवियों की भाँति, रधुवीर सहाय ने प्रतिकों, बिम्बों और मिथकों का सहारा बहुत कम लिया है। इन्होने साधारण बोलचाल की भाषा के अति-साधारण शब्दों का प्रायः गद्यवत प्रयोग ही अधिक किया है। रधुवीर सहाय की कविता कहने के एक खास ढंग को विकसित करती है। कविता की पंक्तियों का वास्तविकता से संवाद निरंतर चलता रहता है। इस संवाद के अंदर से ही कविता का जाल फैलकर विशिष्ट अर्थ को ग्रहण करता है। यहाँ कविता के शब्द अपनी गति से वस्तुओं पर आधात करते हैं।
रामदास कविता में रोज़-रोज़ मरते लोगों की भीड़ में एक जीते-जागते व्यक्ति की विडम्बना   के साक्ष्य से इस कविता का गठन हुआ है। रामदास मरते हुए आधुनिक समाज की ठोस वास्तविकता है। तटस्थता और निरपेक्षता का भाव रामदास की हत्या के लिये जिम्मेदार है। मनुष्य कितना संवेदनहीन और निष्क्रिय हो गया है कि किसी की हत्या भी उसके लिए महज एक सूचना बनकर रह जाती है। 
 

 

प्रतिक्रियाएँ

  1. Manish Kumar अवतार

    इस बेहतरीन कविता से रूबरू कराने के लिए आभार।

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  2. Imtiaz ali अवतार

    यह कविता और जानकारी अपलोड करने के लिए धन्यवाद

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