कपीस गौड़
लोकसभा चुनावों में ‘जुगाड़पुर’ से चमचा पार्टी के अत्यंत लोकप्रिय उम्मीदवार बरसाती लाल के विरूद्व कोई भी उम्मीदवार चुनाव लड़ने को तैयार नहीं था।
ऐसे में छतरी पार्टी ने, जो चमचा पार्टी की मुख्य
प्रतिद्वंदी थी, मुंबई के मशहूर फिल्म अभिनेता ‘मुन्ना मंकी ख़त’ को चुनाव में खड़ा किया। मुन्ना मंकी ख़त को यह विश्वास था की देश की जनता उन्हें इतना चाहती है, की वे कहीं से भी और किसी भी पार्टी के उम्मीदवार के विरूद्व चुनाव लड़ जाएँ, जीत निश्चित रूप से तो उन्हीं की होनी है।
ऐसे में छतरी पार्टी ने, जो चमचा पार्टी की मुख्य
प्रतिद्वंदी थी, मुंबई के मशहूर फिल्म अभिनेता ‘मुन्ना मंकी ख़त’ को चुनाव में खड़ा किया। मुन्ना मंकी ख़त को यह विश्वास था की देश की जनता उन्हें इतना चाहती है, की वे कहीं से भी और किसी भी पार्टी के उम्मीदवार के विरूद्व चुनाव लड़ जाएँ, जीत निश्चित रूप से तो उन्हीं की होनी है। भीषण गर्मी के बीच चुनाव प्रचार शुरू हुआ। कहीं चमचा पार्टी के पोस्टर चिपके थे तो कहीं छतरी पार्टी के इधर चमचा पार्टी के प्रचारक यह घोषणा कर रहे थे की बोतल छाप पर बटन दबा कर बरसाती लाल को विजयी बनायें तो उधर छतरी पार्टी के प्रचारकों की यह घोषणा गूंज रही थी की बन्दर छाप पर बटन दबा कर मुन्ना मंकी ख़त को विजयी बनाकर प्रदेश का विकास करवायें।
चुनावों से ठीक 8 दिन पहले मुन्ना मंकी ख़त ने अपना चुनाव अभियान शुरू किया, बरसाती लाल ने तो बहुत पहले ही अपना चुनाव अभियान प्रारंभ कर लिया था। मुन्ना मंकी ने जनता के बीच घुमने के लिया ‘चुनाव रथ’ का निर्माण करवाया था। मुन्ना मंकी की चुनाव सभाओं में उन्हें देखने के लिए भारी भीड़ जुटती थी जबकि बरसाती लाल की सभाओं में बहुत ही कम, पहले ही दिन के चुनाव प्रचार में गर्मी के मारे मुन्ना मंकी ख़त की हालत ख़राब हो गई।
वह भुक्खड़ होटल के कमरे में गर्मी से परेशान औंधे पड़े रहे, जब सभा में पहुंचे तो सामने की कुर्सियों पर उन की पार्टी के कार्यकर्त्ता बैठे थे मुन्ना मंकी ख़त ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, “कल से मैं शाम 5 बजे से रात के 10 बजे तक अपना चुनाव प्रचार करूँगा।”
वह भुक्खड़ होटल के कमरे में गर्मी से परेशान औंधे पड़े रहे, जब सभा में पहुंचे तो सामने की कुर्सियों पर उन की पार्टी के कार्यकर्त्ता बैठे थे मुन्ना मंकी ख़त ने उन्हें संबोधित करते हुए कहा, “कल से मैं शाम 5 बजे से रात के 10 बजे तक अपना चुनाव प्रचार करूँगा।”
दूसरे दिन, छतरी पार्टी के कार्यकर्त्ता मुन्ना मंकी ख़त को झुगियों के महल्ले, कंगालपुर में ले गए मुन्ना मंकी ख़त ने बदबू के मारे अपनी नाक बंद कर ली और कहा “अरे ! आप लोग मुझे किस जहन्नुम में ले आए हैं, बदबू के मारे मेरा दम निकला जा रहा है, मुझे यहाँ से ले चलो।”
“यहीं के वोटों से चुनाव में हारजीत का फैंसला होता है मुन्ना साहब आपको यहाँ एक आम सभा को संबोधित भी करना होगा।” पार्टी के एक कार्यकर्त्ता ने हंसते हुए कहा।
आनन-फानन में मुन्ना मंकी को इत्र में भीगा हुआ एक रुमाल दिया गया वे रुमाल को इस प्रकार नाक से लगाये हुए थे की जनता को ये समझ में आए की उन्होंने सर्दी के कारण नाक पर रुमाल रखा है। अपने संबोधन में उन्होने कहा, “साथियों, आपने मेरी फिल्म ‘चुनावों के शोले’ तो देखी ही होगी उस में मैंने भारी बहुमत से चुनाव में विलेन को हराया था।“
इस से आप लोगों को पता चल गया होगा की मुझे भी चुनाव लड़ने का अनुभव है। मैं एक मंझा हुआ खिलाडी हूँ और चुनाव जीत कर ही रहूँगा। मुझे उम्मीद है की आप मुझे ही वोट देंगे।
“अरे, चुनावी वादे भी कीजिए मुन्ना मंकी साहब,” एक कार्यकर्त्ता ने फुसफुसा कर कहा “अरे, मैं तो भूल ही गया था,” मुन्ना मंकी ने मुंह घुमा कर कहा और फिर माइक पकड़ कर बोले…
इस से आप लोगों को पता चल गया होगा की मुझे भी चुनाव लड़ने का अनुभव है। मैं एक मंझा हुआ खिलाडी हूँ और चुनाव जीत कर ही रहूँगा। मुझे उम्मीद है की आप मुझे ही वोट देंगे।
“अरे, चुनावी वादे भी कीजिए मुन्ना मंकी साहब,” एक कार्यकर्त्ता ने फुसफुसा कर कहा “अरे, मैं तो भूल ही गया था,” मुन्ना मंकी ने मुंह घुमा कर कहा और फिर माइक पकड़ कर बोले…
“मैं वादा करता हूँ की यदि में चुनाव जीत गया तो आप की बस्ती की गन्दी दीवारों पर सिनेमा के रंगबिरंगे पोस्टर सटवा दूंगा आप के प्रतिभाशाली बच्चों को फिल्मों में चांस दिलवा दूंगा धन्यवाद।” इतना कह कर मुन्ना मंकी मंच से उतरे, और अपने कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव रथ पर बैठे और चल दिए। अगले दिन वे शहर के रहीसपुर की जनता को संबोधित करने पहुंचे।
“अरे, मंकी साहब, जरा अपने किसी फ़िल्मी गाने पर नाच कर तो दिखाइए,” भीड़ में से एक आवाज आई “अवश्य दिखाऊंगा नाच।, परन्तु समय आने पर आप मुझे चुनाव तो जीत लेने दें फिर मैं आप के महोल्ले में एक थियेटर खुलवा दूंगा, जहाँ हर महीने मेरा एक शो होगा आप लोगों को मुफ्त प्रवेश की सुविधा होगी,” मुन्ना मंकी ख़त ने सीना तान कर जनता से कहा।
दुविधापुर की जनसभा में मुन्ना मंकी ख़त ने वादा किया, “मैं आप के शहर 4-5 सिनेमा खुलवा दूंगा, जिस से आप अधिक फिल्में देख सकेंगे।”
टाइमपासपुर में आवारा कुत्तों को घूमता हुआ देख कर मुन्ना मंकी ने कहा, “मैं चुनाव जीतते ही आप के यहाँ से इन आवारा कुत्तों को पकड़वाकर उन की जगह अल्सेशियन कुत्ते छुड़वा दूंगा।” मुन्ना मंकी के इस वादे पर तालियों की गडगडाहट पूरे वातावरण में गूंज उठी।
आखिर लम्बे इंतजार के बाद चुनाव का दिन भी आ ही गया, मुन्ना मंकी ने चुनाव प्रचार में बरसाती लाल को पीछे छोड़ दिया था। चारों और उन्ही के पोस्टर नज़र आ रहे थे।
शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हुए और मतगणना का दिन भी आ पहुंचा। सबसे पहले भ्रष्टपुरी की मतगणना शुरू हुई और मुन्ना मंकी ख़त 25 हजार वोटों से आगे हो गए, इसके बाद रहीसपुर की गिनती मैं मुन्ना मंकी 60 हजार वोटों से आगे हो गए मुन्ना मंकी अपनी विजय के प्रति आश्वस्त हो गए। टाइमपासपुर की गिनती शुरू हुई तो मुन्ना मंकी एक लाख वोटों से आगे हो गए, उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। पर यह क्या? दुविधापुर के मतों की गिनती समाप्त होने पर मुन्ना मंकी की बढ़त 69 हजार पर आ गई। विलाप पुर की गिनती के समाप्त होने के बाद मुन्ना मंकी की बढ़त सिर्फ 10 हजार रह गई।
बरसाती लाल के चेहरे पर मुस्कान थिरक उठी मुन्ना साहब परेशान हो गए। दो और महोल्लों की गिनती के बाद मुन्ना मंकी ख़त एक लाख वोटों से पिछड़ गए अब उन्हें केवल कंगालपुर से आशा थी, लेकिन मतों की गिनती के बाद उनके होश फाकता हो गए।
बरसाती लाल 2 लाख 75 हजार वोटों से चुनाव जीत गए। उन्होंने विजयी मुस्कान से मुन्ना मंकी से हाथ मिलाया और चले गए। मुन्ना मंकी ख़त को समझ में आ गया की, उनकी सभाओं में केवल उन्हें देखने के लिए भीड़ जुट रही थी। जुगाड़ पुर की जनता ने सही आदमी को चुना मुन्ना मंकी को पता लग गया की फिल्मों की पटकथा और वास्तविकता में फर्क होता है। चुनाव लड़ना और राजनीति करना उनके वश का रोग नहीं है, इसलिए वे वापस मुंबई रवाना हो गए ।
“अरे, मंकी साहब, जरा अपने किसी फ़िल्मी गाने पर नाच कर तो दिखाइए,” भीड़ में से एक आवाज आई “अवश्य दिखाऊंगा नाच।, परन्तु समय आने पर आप मुझे चुनाव तो जीत लेने दें फिर मैं आप के महोल्ले में एक थियेटर खुलवा दूंगा, जहाँ हर महीने मेरा एक शो होगा आप लोगों को मुफ्त प्रवेश की सुविधा होगी,” मुन्ना मंकी ख़त ने सीना तान कर जनता से कहा।
दुविधापुर की जनसभा में मुन्ना मंकी ख़त ने वादा किया, “मैं आप के शहर 4-5 सिनेमा खुलवा दूंगा, जिस से आप अधिक फिल्में देख सकेंगे।”
टाइमपासपुर में आवारा कुत्तों को घूमता हुआ देख कर मुन्ना मंकी ने कहा, “मैं चुनाव जीतते ही आप के यहाँ से इन आवारा कुत्तों को पकड़वाकर उन की जगह अल्सेशियन कुत्ते छुड़वा दूंगा।” मुन्ना मंकी के इस वादे पर तालियों की गडगडाहट पूरे वातावरण में गूंज उठी।
आखिर लम्बे इंतजार के बाद चुनाव का दिन भी आ ही गया, मुन्ना मंकी ने चुनाव प्रचार में बरसाती लाल को पीछे छोड़ दिया था। चारों और उन्ही के पोस्टर नज़र आ रहे थे।
शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न हुए और मतगणना का दिन भी आ पहुंचा। सबसे पहले भ्रष्टपुरी की मतगणना शुरू हुई और मुन्ना मंकी ख़त 25 हजार वोटों से आगे हो गए, इसके बाद रहीसपुर की गिनती मैं मुन्ना मंकी 60 हजार वोटों से आगे हो गए मुन्ना मंकी अपनी विजय के प्रति आश्वस्त हो गए। टाइमपासपुर की गिनती शुरू हुई तो मुन्ना मंकी एक लाख वोटों से आगे हो गए, उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था। पर यह क्या? दुविधापुर के मतों की गिनती समाप्त होने पर मुन्ना मंकी की बढ़त 69 हजार पर आ गई। विलाप पुर की गिनती के समाप्त होने के बाद मुन्ना मंकी की बढ़त सिर्फ 10 हजार रह गई।
बरसाती लाल के चेहरे पर मुस्कान थिरक उठी मुन्ना साहब परेशान हो गए। दो और महोल्लों की गिनती के बाद मुन्ना मंकी ख़त एक लाख वोटों से पिछड़ गए अब उन्हें केवल कंगालपुर से आशा थी, लेकिन मतों की गिनती के बाद उनके होश फाकता हो गए।
बरसाती लाल 2 लाख 75 हजार वोटों से चुनाव जीत गए। उन्होंने विजयी मुस्कान से मुन्ना मंकी से हाथ मिलाया और चले गए। मुन्ना मंकी ख़त को समझ में आ गया की, उनकी सभाओं में केवल उन्हें देखने के लिए भीड़ जुट रही थी। जुगाड़ पुर की जनता ने सही आदमी को चुना मुन्ना मंकी को पता लग गया की फिल्मों की पटकथा और वास्तविकता में फर्क होता है। चुनाव लड़ना और राजनीति करना उनके वश का रोग नहीं है, इसलिए वे वापस मुंबई रवाना हो गए ।

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